26 अक्टूबर 2019 - 13:43
सीरिया में फिर अपनी सैनिक उपस्थिति मज़बूत करने के चक्कर में पड़ गया अमरीका, क्या कुर्दों ने सीरिया और रूस दोनों को धोखा दिया? यह

अरब दुनिया के मशहूर टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने पूर्वोत्तरी सीरिया से अपने सैनिक बाहर निकालने के फ़ैसले से पलटी मारी है और रक्षा मंत्री मार्क इस्पर ने कहा है कि हसका तथा पूर्वी दैरुज़्ज़ूर के इलाक़ों में तेल और गैस के भंडारों की रक्षा के लिए अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी ताकि यह भंडार दाइश के हाथ न लग जाएं।

ट्रम्प ने अपने फ़ैसले में जो बदलाव किया है उससे ज़ाहिर है कि सीरिया के मामले में ट्रम्प ने कांग्रेस तथा कुछ सैनिक अधिकारियों का दबाव पड़ने के कारण कुर्दों का साथ छोड़ने पर अब पछताना शुरू कर दिया है। सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस मामले में ट्रम्प की बड़ी आलोचना की थी।

कुर्द फ़ोर्सेज़ जिन्होंने फ़ुरात नदी के पूर्वी इलाक़ों में तेल और गैस के भंडारों पर क़ब्ज़ा कर रखा है लगता है ट्रम्प की तरह आखिरी क्षणों में अपने फ़ैसले से पलटी मारने की तैयारी में हैं। हालांकि कुर्द फ़ोर्सेज़ ने रूस की मध्यस्थता से सीरियाई सरकार से समझौता कर लिया था ताकि तुर्की के हमलों से ख़ुद को बचा सकें।

ट्रम्प ने कुर्द फ़ोर्सेज़ के कमांडर मज़लूम अब्दी से टेलीफ़ोनी वार्ता के बाद अपना फ़ैसला बदला और कहा कि अमरीकी सैनिक पूर्वोत्तरी सीरिया में लंबे समय तक बाक़ी रहेंगे। मज़लूम अब्दी ने इस फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि वह अमरीकी छत्रछाया में पुनः लौटने के लिए तैयार हैं और सीरियाई सरकार से समझौते की प्रक्रिया को समाप्त कर देंगे। इस स्थिति पर सीरिया, रूस और तुर्की का नाराज़ होना तय है। बल्कि शायद यह तीनों ही देश कुर्द फ़ोर्सेज़ के खिलाफ़ एकजुट हो जाएं। क्योंकि इलाक़े से मिलने वाली जानकारियों से इसी बात के संकेत मिल रहे हैं।

ट्रम्प को दरअस्ल यह डर नहीं है कि तेल और गैस के भंडार दाइश के हाथ लग सकते हैं ब्लकि उन्हें यह डर है कि यह भंडार सीरियाई सरकार को वापस मिल सकते हैं। यहां से साढ़े तीन लाख बैरल तेल रोज़ाना निकलता है। यह सीरियाई सरकार की महत्वपूर्ण संपत्ति है जिससे वह ऊर्जा की ज़रूरतें पूरी करती है जबकि शेष रक़म देश के पुनरनिर्माण पर ख़र्च कर सकती है।

हमें नहीं लगता कि कुर्द फ़ोर्सेज़ और अमरीकी सैनिक सीरिया के तेल भंडारों पर ज़्यादा दिनों तक क़ब्ज़ा जारी रख पाएंगे। इस इलाक़े में उन पर सीरिया और रूस का हमला हो सकता है बल्कि इराक़ी स्वयंसेवी बल हश्दुश्शअबी का ही हमला भी संभव है जो सीरियाई सीमा के उस पार मौजूद हैं।

ट्रम्प का मामला यह है कि उन्हें पैसे के अलावा कुछ सुझाई नहीं देता। उन्होंने कुर्दों का साथ छोड़ने का फ़ैसला भी इसीलिए किया था कि इस सपोर्ट पर आने वाले खर्च से अमरीका को बचाएं। अब हो सकता है कि वह अमरीकी सुरक्षा कंपनियों की मदद से सीरिया के तेल भंडारों पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करें ताकि सीरिया की धरती पर अमरीकी सैनिकों की तैनाती का खर्च वहीं से निकाल सकें।

कुर्दों का अमरीकी ख़ैमे में लौटना और सीरिया और रूस को धोखा देना यह बताता है कि कुर्दों पर हरगिज़ भरोसा नहीं किया जा सकता बिल्कुल उसी तरह जैसे ट्रम्प पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

खेद की बात यह है कि कुर्द भाई पुराने अनुभवों से पाठ नहीं लेते बस अमरीकियों और इस्राईलियों के पीछे ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद के नारे लगाते रहते हैं। उनके साथ वह गठबंधन करके अरबों को तुर्कों को और अब रूस को निशाना बनाने के ख्वाब देखते हैं।

सीरियाई सेना जिसने देश की धरती का अधिकतर भाग विदेशी क़ब्ज़े से आज़ाद कराया है वह पूर्वोत्तरी सीरिया के इलाक़ों को भी आजाद कराएगी। अमरीकी यहां से सिर पर पांव रखकर भागेंगे और हमेशा की तरह इस बार भी सबसे अधिक नुक़सान उठाने वाले कुर्द ही होंगे। हमें तो इस बात की संभावना भी नज़र आ रही है कि अब सीरिया और तुर्की के बीच सहयोग शुरू हो जाए।